शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

फेसबुक की गोद में व्हाट्स एप

यार जुकरबर्ग, कभी-कभी तुम्हारे अद्भूत कारनामों को देख-सुनकर मेरे दिल के अंदर जलन-सी होती है। न न इस जलन को कुढ़ने-चिढ़ने वाली जलन मत समझना। यह जलन तो तुम्हारे बरक्स न आ पाने की खुद से है। यों, तुम्हारी मेरी उम्र में कोई खास अंतर नहीं लेकिन जो कामयाबियां तुमने हासिल की हैं, उन तलक पहुंचना वाकई हर किसी के बस की बात नहीं। हां हां सौ फीसद ठीक बोल रहा हूं प्यारे। विरले ही होते हैं, जो मार्क जुकरबर्ग या बिल गेट्स बन पाते हैं। सच्ची।

और एक मैं हूं, जिसे इत्ते साल हो गए कलम रगड़ाई करते-करते मगर हाथ पल्ले बड़ा तो क्या अभी तलक छोटा पुरस्कार भी नहीं आया है।

सलाह देने वाले तो कहते हैं कि जुगाड़ सेट कर लो फिर पुरस्कार तो क्या चयन-मंडली में ही तुम्हारा नाम शामिल कर लिया जाएगा। लेकिन यार मैं भी हूं बड़ा सियाना, चाहे पुरस्कार उम्र भर न मिले पर जोड़-जुगाड़ की गलियों में नहीं भटकूंगा। अमां, असली पुरस्कार तो वो है, जो स्वतः मिले। है कि नहीं?

लेकिन प्यारे जुकरबर्ग तुम्हें देखता हूं तो लगता है कि प्रसिद्धि ऐसी ही होनी चाहिए। कि, पुरस्कार-सम्मान हर वक्त कदमों में बिछे पड़े रहें। तुम जहां खड़े हो जाओ, दुनिया खुद-ब-खुद खींची चली आए।

फेसबुक के सहारे तुमने दुनिया को जो खींचा है, यार कमाल ही कर दिया है। कह सकता हूं कि दुनिया तुम्हारी बनाई सोशल नेटवर्किंग की हद दर्जे तक दीवानी-मस्तानी हो गई है। बंदा एक बार को 'लगाना' भूल सकता है किंतु फेसबुक पर 'टलना' नहीं। फेसबुक को तुमने 'आदत' बना दिया है मेरे दोस्त। इस आदत के शिकार जवान भी हैं, बूढ़े भी और बच्चे भी। यार, मैंने तो उन लोगों को फेसबुक पर चलह-कदमी करते देखा है, जिन्हें पता न फेसबुक के मालिक का है, न इस्पेलिंग का। मगर हैं दीवाने फेसबुक के। कमाल है प्यारे वाकई कमाल।

यार जुकरबर्ग, एक कमाल तुमने और कर दिया व्हाट्स एप को उन्नीस अरब डॉलर में खरीदकर। उन्नीस अरब डॉलर कित्ते होते होंगे यार? यहां तो कभी उन्नीस हजार साक्षात नहीं देख पाया हूं। पर्स की हैसियत कभी उन्नीस रुपए से आगे बढ़ ही नहीं पाई। बहरहाल...फेसबुक की गोद में व्हाट्स एप को बैठा देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। बधाई तुमको।

बतलाऊं तुम्हें, मेरे मोहल्ले के लगभग सभी लोग फेसबुक के साथ-साथ अब व्हाट्स एप पर भी हैं। जवान बंदे-बंदियां तो रात-दिन व्हाट्स एप, व्हाट्स एप ही खेलते रहते हैं। व्हाट्स एप की बढ़ती डिमांड ने बेचारे एसएमएस के बाजार को फीका कर दिया है। खबरें बताती हैं कि फेसबुक के बाद व्हाट्स एप दूसरी ऐसी एप्लिकेशन बन गई है, जिसने सोशल नेटवर्किंग में क्रांति-सी ला दी है।

देखो न, लव-शव, लड़ाई-झगड़ा, तलाक-प्रपोज, मिलना-बतियाना अब सब व्हाट्स एप पर है। गजब तो यह है कि अब एप बच्चा पालने के साथ-साथ हग करने का आइडिया भी देने लगी हैं। व्हाट्स एप से चीजें काफी नजदीक लगने लगी हैं। कुछ भी, कैसा भी चित्र या संदेश आराम से भेजो। न पैक का झंझट, न बेलैंस कटने का रगड़ा।

फेसबुक और व्हाट्स एप की जुगलबंदी, उम्मीद करता हूं, सोशल नेटवर्किंग की दुनिया में काफी कुछ और नया रचेगी। लेकिन यार जुकरबर्ग मेरी तुमसे जलन की भावना कभी कम न होगी। तुम्हारे प्रति जलन रखकर मेरी दिल की अगन को शांति मिलती है। कसम से...।

कोई टिप्पणी नहीं: