बुधवार, 12 फ़रवरी 2014

लव गुरु और वेलेंटाइन डे

मेरे मोहल्ले के लव गुरु तंगहाल हैं। बा-मुश्किल गुजारा कर पा रहे हैं। अब न कोई आशिक, न मजनूं, न दीवाना, न मस्ताना उनके कने नहीं आता सलाह लेने को। भूले-भटके जो चले आते हैं, वो लव पर नहीं तलाक पर सलाह लेने आते हैं। हालांकि तलाक पर सलाह देना लव गुरु का काम नहीं लेकिन, फिर भी, वे दे देते हैं। क्या करें, मद्दे में ये ही भला।

मोहल्ले में आते-जाते एकाध दफा मुझ भी पकड़ कर बोले हैं कि सलाह ले लो। चाहे मुफ्त ही सही। ताउम्र काम आएगी। मैं मना कर देता हूं। मुझे अब किसी लव गुरु की सलाह की जरूरत नहीं। बिना सलाह ही मेरी लव-लाइफ मस्त चल रही है। सलाह तरह-तरह की टेंशन देती हैं। सलाह लेने के बाद बंदा न प्रेमिका का रह पाता है न प्रेम का। बीच में लटककर रह जाता है- पेंडुलम की तरह।

लेकिन प्यारे मैं मोहल्ले के लव गुरुओं का वो 'गोल्डन पीरियड' भूला नहीं हूं, जब उनके घर के आजू-वाजू लाइनें लगी रहती थीं- लव पर सलाह लेने वालों की। क्या जवान, क्या बूढ़ा, क्या कुंआरा, क्या शादीशुदा हर कोई लव गुरु के चरणों में नतमस्तक रहता था। जो उलटा-सीधा, आड़ा-तिरछा लव गुरु बता देते थे, अंतिम सत्य मानकर बंदे पालन किया करते थे। उस वक्त लव गुरु की फीस इत्ती होती थी कि क्या डॉक्टर की होगी। तब लव गुरु के कदम धरती पर पड़ते ही कहां थे। हर वक्त दिमाग चौथे आसमान पर और ध्यान कमाई पर लगा रहता था। न मोहल्ले में किसी से सीधे मुंह बात करते थे, न किसी के घर आया-जाया करते थे। पूछो तो कहते थे- अगला मेरे स्टेटस का नहीं, तो क्यों जाऊं। मैं कोई खाली थोड़े हूं।

मगर अब यह हाल है कि लव गुरु नुक्कड़ से पकड़-पकड़ कर लाते बंदों को और फीस भी नहीं मांगते।

इधर जाने कित्ते वेलेंटाइन डे निकल गए पर सलाह लेने एक भी बंदा लव गुरु कने नहीं फटका। इस बार भी वही हाल है। वेलेंटाइन डे पर अपनी दुकान सजाए बैठे हैं लव गुरु मगर कोई आता ही नहीं। नुक्कड़ पर बसी गिफ्ट शॉप पर तो जवान लड़के-लड़कियों की भीड़ रहती है मगर हमारे लव गुरु निठ्ठले।

दरअसल, जब से स्मार्टफोन का जमाना आया है, तब से एक मेरे मोहल्ले के ही नहीं, देश भर के लव गुरुओं की दुकान ठंडी-सी पड़ गई है। कोई मजबूरी में जरूर चला जाता हो लव गुरुओं कने लेकिन स्मार्टफोन वाला बंदा नहीं ही जाता होगा। जाकर करेगा भी क्या? स्मार्टफोन में मौजूद हर प्रकार की एप उसकी मुफ्त में सहायता कर तो रही हैं। डे चाहे वेलेंटाइन का हो या हग का हर तौर-तरीका मौजूद है एप में। अमां, जब एप भूले को सही रास्ता बतला सकती हैं, मौसम का सही हाल-चाल दे सकती हैं, बच्चों की परवरिश के अंड़े-फंडे बता सकती हैं, फिर ये तो लव है। लव पर हजारों तरह की सलाहें-जानकारियां मौजूद हैं इंटरनेट और स्मार्टफोन पर। फिर लव गुरु कने जाकर क्यों खाली-पाली दिमाग और नोट खर्च करना?

वैसे, स्मार्टफोन-युक्त जनरेशन खुद ही इत्ती स्मार्ट है, उसे भला क्या जरूरत किसी लव-शव गुरु की। अब तो वो लव गुरुओं को सलाह देने का हौसला रखती है। किसी जमाने में लव गुरु जिस सलाह को हौले से कान में दिया करते थे, अब वो यंग-जनरेशन के लिए आम बात है। अब प्यार का इजहार खत से नहीं, एसएमएस या वॉट्सएप पर होता है। वी-चैट और स्काईपे ने तो काम और भी आसान कर दिया है।

मेरे विचार में, लव गुरुओं को सलाहगिरी छोड़कर स्मार्टफोन पर आ जाना चाहिए। खुद को जनरेशन के हिसाब से स्मार्ट बनाना चाहिए। तब ही बचे रह सकते हैं उनके लव फंडे, नहीं तो दुकान यों ही फीकी रहेगी प्यारे।

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