शनिवार, 4 मई 2013

हे! विकीलीक्स, मेरी पोल भी खोल


विकीलीक्स के केबल का मैं मुरीद हूं। दिल से चाहता हूं कि विकीलीक्स एक केबल मेरे घर पर भी डाले। मैं भी विकीलीक्स के केबल में फंस जाऊं। किसी न किसी बहाने मेरी पोल भी खुल जाए। पोल खुलकर मैं बदनाम हो जाऊं। मीडिया से लेकर रिश्तेदारों के बीच मेरी बदनामी पर तरह-तरह की चर्चाएं हों। फैलते-फैलते मेरी बदनामी की बातें संसद के भीतर भी पहुंच जाएं। सांसद लोग मुझ पर जिरह करें। कोई मुझे दुत्कारे, कोई मुझे लताड़े। कोई मेरा हुक्का-पानी बंद करने का प्रस्ताव रखे। आह! कित्ता खुशनुमा होगा वो दिन जब विकीलीक्स मेरी ईमानदारी पर से बदनामी की पोल खोलेगा।

सच कहूं, जब भी मैं विकीलीक्स को अलां-फलां नेता लोगों की पोल खोलते सुनता-पढ़ता हूं, मेरे मन में उनके प्रति सम्मान का भाव जागता है। सम्मान के बहाने उनकी महानता पर कसीदे पढ़ने का दिल करता है। रात भर में ही वे लोग बदनाम होने के साथ-साथ नामवाले हो जाते हैं। जो लोग नहीं जानते, वे भी उनके नाम को जान-पहचान जाते हैं।

बस, ऐसा ही नाम मैं भी चाहता हूं। मुझे इस बात की रत्ती भर फिक्र नहीं कि बदनामी के कारण मेरा नाम होगा। आजकल जमाना ही बदनामी के सहारे नाम कमाने वालों का है। जिनका नाम होता है, उन्हें ही लोग-बाग हिम्मवाला कहते हैं। जी हां, मैं भी वैसा ही हिम्मतवाला बनना चाहता हूं। विकीलीक्स के बहाने पोल खुलकर बदनाम होने का सुख ही कुछ और है प्यारे।

न भूलें, विकीलीक्स की पोल खुलाई से अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि मिलती है।

पर मुझे यह समझ नहीं आता कि लोग विकीलीक्स को इत्ता बुरा-भला क्यों कहते हैं? जहां किसी की पोल खुली नहीं, बस चेले-चपाटे तैयार हो जाते हैं, अपने लोगों को डिफेंट करने और विकीलीक्स को उट-पटांग कहने के लिए। समझने का प्रयास ही नहीं करते कि विकीलीक्स के केबल हमेशा सच बोलते हैं, सच के सिवाय कुछ नहीं बोलते। मुफ्त में घर बैठे एक अंतरराष्ट्रीय पोल खोलू एजंसी से अगर अपने नाम पर बदनामी का ठप्पा लग रहा है, तो उसमें हर्ज ही क्या है! ऐसा सौभाग्य केवल नसीब वालों को ही नसीब होता है।

मैं तो इस प्रयास में हूं कि विकीलीक्स के बहाने ही सही मेरा नसीब भी जागे। खुद की पोल खुलने के एहसास को मैं मंजरे-आम पर देखना व महसूस करना चाहता हूं। किसी को हो या न हो मगर मुझे अपनी मुफ्त की बदनामी को कैश करने का बहुत शौक है। मैं चाहता हूं मेरे इस शौक में हर कोई भागीदार बने।

कहे कोई कुछ भी लेकिन इत्ता तो मानना ही पड़ेगा कि विकीलीक्स के पोल खोलू केबल हमारे यहां की जासूसी एजंसियों से कहीं ज्यादा मजबूत एवं चपल हैं। अब तलक विकीलीक्स ने जित्तों की पोल खोली है, सभी किसी न किसी मामले में फंसे नजर आए हैं। बावजूद इसके वे विकीलीक्स को बुरा-भला कहते हैं, वाकई यह बहुत ही दुखद है।

लेकिन मैं निश्चिंत कर देना चाहता हूं विकीलीक्स को कि मैं अपनी पोल खुलाई या बदनामी पर उसे जरा भी नहीं कोसूंगा। दिल से उसके खुलासे का समर्थन करूंगा। अगर संभव हुआ तो विकीलीक्स के संस्थापक जुलियन असांजे को रात्री भोज पर भी आमंत्रित करूंगा। मैं जुलियन अंसाजे का फैन हूं।

अब बस इंतजार है विकीलीक्स के बहाने खुद की पोल खुलाई का। बदनाम होने का। नाम कमाने का। नाम के सहारे हिम्मतवाला बनने का। और मीडियाई सुर्खियां बटोरने का।

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