गुरुवार, 2 मई 2013

नियंत्रण-मुक्त चीनी


सरकार का 'धन्यवाद' कि उसने चीनी पर से खुद का नियंत्रण हटा लिया। चीनी अबसे बाजार के हवाले हैं। बाजार जैसा चाहेगा, चीनी वैसी ही बिकेगी। दरअसल, सरकार को यह काम बहुत पहले ही कर लेना चाहिए था। सरकार खुद पर से जित्ता हो सके, उत्ता बोझ तो कम करे ही। आखिर सरकार कब तलक चीनी, चावल, आटे-दाल, तेल आदि के भाव को संभालती रहेगी। सरकार कने और भी जरूरी काम हैं। और फिर सरकार एक अरब लोगों को संभाल रही है, यह क्या कम है!

आजकल का जमाना 'बाजार' का है। समाज-देश-राजनीति में चीजें बाजार के हिसाब से ही तय हो रही हैं। जैसा बाजार चाहता है, वैसा होता है। इसमें कोई बुराई भी नहीं। बाजार की गिरफ्त में आते ही हर चीज का हुलिया बदल जाता है। देखिए न, फैशन से लेकर राशन तक धीरे-धीरे कर सबको बाजार ने बदल डाला है। अब न कंट्रोल की दुकानों पर भीड़ लगती है न खरीददारी के लिए सड़कों पर मारा-मारी रहती है। सब अब 'ऑन-लाइन' है। बाजार ने खरीददारी को इत्ता सरल बना दिया है कि आप चीनी से लेकर कपड़े तक सब ऑन-लाइन खरीद सकते हैं। न नकद का झंझट न मोल-भाव तय करने का लफड़ा।

बाजार हमेशा लाभ की बात करता है। यह बात सरकार भी जानती है। सरकार के इस कदम से शुगर इंडस्ट्री को खासा लाभ मिलने की उम्मीद है। अब चीनी ज्यादा स्मार्ट होकर बिका करेगी। बढ़िया है, बाजार के सहारे अगर चीनी की स्मार्टनेस में इजाफा हो रहा है, तो क्या बुराई है!

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि चीनी ने हम इंसानों पर जुलम भी बहुत ढाहे हैं। आज हर घर में एक न एक बंदा तो शुगर का मारा मिलेगा ही। शुगर की बीमारी ने रहन-सहन के साथ-साथ खाने-पीने तक के हाजमे को बिगाड़ कर रख दिया है। यह वजह है कि लोगों के बीच शुगर-फ्री का चलन तेजी से बढ़ रहा है। मैंने तमाम लोग ऐसे देखे हैं, जिन्हें चीनी का नाम सुनते ही शुगर का दौरा पड़ना शुरू हो जाता है।

तो फिर सरकार ने क्या गलत किया जो चीनी को बाजार के हवाले कर दिया। बाजार अपने ढंग से चीनी की कीमत बढ़ाए-घटाएगा। इस बहाने कम से कम चीनी के प्रति लोगों का नजरिया तो बदलेगा।

बहरहाल, सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए मैंने भी चाय में चीनी की मात्रा को कम कर दिया है। चीनी का हिसाब भी पेट्रोल की तरह रखा है। दाम के बढ़ने-घटने को उसी हिसाब से मैनेज करता हूं। इस महंगाई में कुछ तो ऐसा किया जाए ताकि बोझ का दवाब कहीं तो कम हो। वरना सरकार तो मानने वाली नहीं। उसने तो ठान ली है जब तलक सत्ता में रहेगी महंगाई का साथ नहीं छोडेगी।

गुजारिश सबों से यही है कि अपनी-अपनी जीभ पर नियंत्रण रखें। उसे ज्यादा मीठी न बनाएं। शुगर-फ्री की आदत डाल लें। सरकार जैसा चलने को कहे, ठीक वैसा ही चलते रहें। अभी चीनी को सरकार ने नियंत्रण-मुक्त किया, हो सकता है कल को वो गेंहू-आटे को भी नियंत्रण-मुक्त कर दे। आखिर वो सरकार है, कुछ भी कर सकती है। इसीलिए सरकार के फैसलों पर बहस न करें। बस, खुद को उसके सांचे में ढालने का प्रयास करते रहें।

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