शनिवार, 4 मई 2013

महंगाई बढ़ाते गरीब!


सुब्बा जी ने कुछ गलत नहीं कहा। सौ फीसद सच कहा। मैं उनके कहे का दिल से समर्थन करता हूं। बे-वजह ही लोग-बाग अमीरों को महंगाई और खान-पान के लिए गरियाते रहते हैं। जबकि महंगाई बढ़ाने में सबसे बड़ा हाथ देश के गरीबों का है। देश के गरीब अब गरीब नहीं रहे। वे गरीब बने रहकर अमीरों की बराबरी करने लगे हैं। अमीरों की तरह खाने, अमीरों की तरह रहने, अमीरों की तरह हंसने-बोलने, अमीरों की तरह मुटियाने लगे हैं।

बताइए, दूध-धी-मक्खन-अंडा यह सब क्या गरीबों के खाने की चीजें हैं! लेकिन फिर भी देश के गरीब इन्हें मजे से खा रहे हैं। अमीरों का खाना गरीब खाएं, भला कौन बर्दाशत करेगा? कम से कम सुब्बा जी तो कतई नहीं करेंगे। इसीलिए उनने साफ कह दिया कि गरीब ही देश में महंगाई बढ़ा रहे हैं।

मेरी कम-अक्ली देखिए, मैं अब तलक सरकार और अमीरों को ही महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहराता रहा। जब भी खाने-पीने के दामों में बढ़ोत्तरी होती, सरकार पर मेरा खून जरूर खौलता। 'आरओ' का पानी पी-पीकर उन्हें कोसता। हाय! मैं कित्ता मूर्ख था। सरकार व अमीरों के प्रति कित्ती दुष्ट सोच रखता था। वो तो भला हो सुब्बा जी का जो उनने सही समय पर बतला दिया कि महंगाई और मोटापा गरीबों के कारण ही तो बढ़ रहा है।

मुझे लगता है, देश के गरीब अक्सर भूखे होने की नौटंकी करते हैं। अपने शरीर को कंकालनुमा दिखलाकर सरकार व अमीरों की हमदर्दी बटोरना चाहते हैं। पेट में अन्न के तमाम दाने पड़े रहने के बावजूद झूठ बोलते हैं कि उनने कई दिनों से कुछ खाया नहीं। खाने के वास्ते हाथ फैलाना गरीब की पुरानी आदत है। लेकिन हमारी सरकार भी अजीब है गरीब की नौटंकी को सच मान लेती है। उसके तईं आनाज सस्ता कर देती है। और तो और चुनावों के वक्त उसके पैर तक पकड़ लेती है। मेरे विचार में देश के गरीबों को इत्ता भाव देना ठीक नहीं।

खुद ही देख लीजिए, हमारा देश कित्ती तेजी से प्रगति कर रहा है। हमारी प्रगतिशील सरकार विकास दर को हमेशा ऊंचा बनाए रखने में लगी रहती है। सुब्बा जी समय-समय पर ब्याज दरों में कटौती कर देश की जनता पर लोन का बोझ कम करने का प्रयास करते रहते हैं। सरकार और सुब्बा जी के प्रयासों का असर गरीबों पर साफ मालूम चल रहा है। गरीब भी अब अमीरों के बराबर प्रगति कर रहे हैं। गरीबों की प्रगति अगर देखना है तो दिल्ली में देखिए, गुजरात में देखिए, बिहार में देखिए, मध्य-प्रदेश में देखिए और कुछ-कुछ उत्तर प्रदेश में भी देख सकते हैं। आजकल गुजरात की प्रगति की तो खूब चरचाएं हैं यहां-वहां।

दरअसल, प्रगति कर-करके गरीब ही देश के भीतर महंगाई को बढ़ा रहे हैं। प्रगति करना ठीक बात है परंतु खान-पान पर भी तो कंट्रोल रखना चाहिए देश के गरीबों को। लेकिन अच्छा खाना खाने बगैर मानते ही नहीं। अरे, यह क्या तुक है कि जो अमीर खाएं वो गरीब भी खाएं! खाने की यह जिद्द ही तो महंगाई को बढ़ा रही है। बिल्कुल सही फरमाया सुब्बा जी।

आगे से आप भी कान खोलकर सुन लें महंगाई के लिए अमीरों को कतई दोष न दें। हमेशा ध्यान रखें कि देश के गरीब ही महंगाई को बढ़ा रहे हैं, अच्छा खा-पीकर। फिर भी अगर देश का गरीब खुद को गरीब कहता है तो साफ झूठ बोलता है। आप गरीब की भूख पर न जाएं। अपनी अक्ल लगाएं और सुब्बा जी के कहे पर गौर फरमाएं।

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