गुरुवार, 2 मई 2013

आईपीएल और चियरलिडर्स


लीजिए, आईपीएल-6 भी शुरू हो गया। अब अगले 54 दिनों तलक मस्ती ही मस्ती, रोमांच ही रोमांच तारी रहेगा। क्रिकेट-प्रेमी तो दिनभर टी.वी. में मुंह घुसेड़े बैठे रहेंगे। खबरिया चैनल अपने-अपने तरीके से आईपीएल का मजा दर्शकों को दिखाएंगे और टीआरपी का ग्राफ बढ़ाएंगे। थोड़े दिनों के लिए देश-समाज के बीच से समस्त समस्याएं विलुप्त हो जाएंगी। न महंगाई पर बात होगी, न भ्रष्टाचार का जिक्र होगा, न पानी का रोना रोया जाएगा, न राजनीतिक स्थिरिता-अस्थिरिता पर बहस छिड़ेगी। केंद्र में अगर कुछ होगा तो बस आईपीएल, आईपीएल और आईपीएल ही होगा। बढ़िया है, इस बहाने कम से कम देश-समाज बेतुके झंझटों से मुक्ति तो पाएगा।

साथ ही साथ आईपीएल के बहाने मुझे भी सुनहरा मौका मिल जाएगा चियरलीडर्स को ताड़ने-घूरने का। कुछ हद तक आईपीएल की मस्ती का दारोमदार चियरलिडर्स की अदाओं पर भी निर्भर करता है। चौक्का पड़े या छक्का चियरलिडर्स का जलवा देखने लायक होता है वहां। चियरलिडर्स की मस्तियों को देखकर अक्सर मन करता है, उनके साथ नाचने-कूदने का। मनोरंजन का पूरा टॉनिक उनमें समाहित रहता है।

मेरे विचार में चियरलिडर्स की भूमिका केवल आईपीएल में ही नहीं बल्कि वन-डे और टेस्ट क्रिकेट में भी समान रूप से होनी चाहिए। यानी खेल का खेल और मनोरंजन का मनोरंजन।

चियरलिडर्स में जाने क्या कशिश-सी होती है कि उन्हें देखते ही मेरे सारे गम, सारी दिक्कतें पलभर में रफूचक्कर हो जाती हैं। उनकी कमर की थिरकन खेल के रोमांच को दूना कर देती है। जिस स्त्री-विमर्श के वास्ते हम यहां-वहां भागते-फिरते हैं, वो पूरा का पूरा उनके भीतर मौजूद रहता है। बावजूद इसके, कुछ लोग चियरलिडर्स को अश्लील और उनके नृत्य को अश्लीलता करार देते हैं। नादान हैं लोग जो शील-अश्लील में फर्क नहीं समझते। उन्हें पता ही नहीं कि सिर्फ चियरलिडर्स के कारण ही तो आईपीएल का रोमांच बरकरार है।

चियरलिडर्स की यह बात मुझे बेहद भाती है कि वे घूरने या तांकने का बुरा नहीं मानतीं। आप आराम से उन्हें देखकर अपनी आंखों को शीतल कर सकते हैं। आपके कने दोनों विकल्प हैं, चाहे तो उन्हें मैदान में घूरें या फिर अपने टी. वी. चैनल पर। कहीं किसी किस्म की कोई रोक-टोक नहीं। सचमुच चियरलिडर्स का दिल बड़ा होता है।

मेरा तो सभी से यह कहना है कि सब लोग चियरलिडर्स के संग-साथ अपने-अपने दिलों को लगाए रखें। उनमें अश्लीलता नहीं मनोरंजन को खोजें। अश्लीलता पर आधारित तमाम दकियानूसी स्थापनाओं से बाहर आकर केवल चियरलिडर्स पर ध्यान केंद्रित रखें। फिर देखिएगा कि दिल-दिमाग कित्ता सुकून पता है।

फिलहाल, मैंने पत्नी से कह दिया है कि अगले 54 दिनों तक उसे न देखकर मैं सिर्फ चियरलिडर्स को ही देखूंगा। उनकी दिलकश मस्ती में डूबा रहूंगा। उनके नृत्य, उनकी कमर, उनकी अदाओं का भरपूर मनोरंजन उठाऊंगा। फिर भी अगर पत्नी को बुरा मानना है तो मना जाए चियरलिडर्स की खातिर हर खतरा उठाने को मैं तैयार हूं!

मैं चाहता हूं आईपीएल की मस्ती का जुनून ऐसे ही सब पर तारी रहे। दीन-दुनिया को भूल सब बस आईपीएल की रोमानियत में ही डूबे रहें। क्रिकेट के साथ-साथ चियरलिडर्स के जलबों को एनजॉय करें। और जो जो कुछ भी कह रहा है, उस पर खाक डालें। बस इत्ता ध्यान रखें, अगर आईपीएल का मनोरंजन पास है तो सबकुछ पास है प्यारे।

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