शनिवार, 4 मई 2013

तारीफ की कीमत


लीजिए जनाब, अब तारीफ करना भी 'गुनाह' की श्रेणी में आ गया है। इस गुनाह की कीमत एक मंत्री जी को मंत्रिमंडल से 'बर्खास्त' होकर चुकानी पड़ी है। बेचारे मंत्री जी का गुनाह बस इत्ता-सा था कि उन्होंने सड़कों को हेमा मालिनी और माधुरी दीक्षित के गालों जैसा बनवाने की बात कही थी। आखिर इसमें क्या गलत है अगर प्रदेश की सड़कें हेमा मालिनी और माधुरी दीक्षित के गालों सरीखी हो जाएं। सुंदरता की तारीफ करना कोई गुनाह तो नहीं प्यारे!

दुनिया भर में तमाम तरह के लोग अपने-अपने तरीके से अभिनेत्रियों की खूबसूरती की तारीफ करते रहते हैं, उनका तो कुछ नहीं बिगड़ता। एक बेचारे हमारे मंत्री जी ने तारीफ क्या कर दी, उनकी गर्दन पर बर्खास्तगी की तलवार चला दी गई। बहुत ना-इंसाफी है यह। इसका मतलब तो यह हुआ कि मंत्री स्तर के हर मंत्री को अब किसी अभिनेत्री की तारीफ करने से पहले सौ दफा सोचना पड़ेगा। कुछके तो अरमान दिल के दिल में ही रह जाएंगे।

अरे, हमें तो धन्यवाद देना चाहिए मंत्री जी को कि उन्होंने हेमा मालिनी और माधुरी दीक्षित के बहाने खूबसूरत सड़कों का एक बेहतरीन मॉडल प्रस्तुत किया। कित्ता अच्छा होता अगर मंत्री जी के मॉडल को संज्ञान में लाकर इस पर गंभीरता के काम किया जाता। सड़कों को निहायत ही खूबसूरत और चिकना बनाया जाता। उन पर से गड्ढेनुमा दागों को हटाया जाता। गड्ढे हर तरह से खूबसूरती में बाधक होते हैं। प्रदेश की ज्यादातर सड़कों पर गड्ढों का ही राज रहता है। सड़क-यात्रा के दौरान पिछले दिनों एक मंत्री जी की कमर में गड्ढों के कारण दर्द बैठ गया। मंत्री जी गड्ढों से कहीं ज्यादा उस सड़क को बनाने वालों पर नाराज हुए। मंत्री जी की नारजगी का मैं समर्थन करता हूं। दरअसल, सड़क पर चलकर ही पता लगाया जा सकता है कि सरकार के मंत्री कित्ता और कहां तक काम कर रहे हैं।

लेकिन यह मामला सड़क से कहीं ज्यादा खूबसूरती की तारीफ करने का बनता है। खूबसूरती के सिंबल को अभिनेत्रियों में ही खोजा व परखा जा सकता है।

मेरे ख्याल में जहां बात देश-प्रदेश-राज्य के विकास की हो वहां ऐसी खूबसूरतियों पर विचार के साथ-साथ तारीफ करने में भी कोई हर्ज नहीं होना चाहिए। खूबसूरती होती ही तारीफ करने के लिए है।

मुझे दुख होता है, जो लोग खूबसूरती की तारीफ को पचा नहीं पाते। तारीफ को हीन भावना से देखते हैं। तारीफ पर पहरे बैठाते हैं। जरा सोचकर देखिए, बेचारे मंत्री जी के दिल पर क्या गुजरी होगी, जो उन्हें तारीफ इत्ती बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। इसमें बुरा भी क्या है अगर सड़कें अभिनेत्रियों के गालों जैसी हो जाएं तो। इत्ती खूबसूरत सड़कों पर चलने का आनंद ही कुछ और होगा।

तारीफ की कीमत अगर मंत्रियों को ऐसे ही चुकानी पड़ती रही तो विकास का मॉडल ही ध्वस्त हो जाएगा। फिर न कोई किसी की तारीफ करेगा न सुंदरता पर आहें भरेगा। फिर तो तारीफ के सारे विकल्प ही खत्म हो जाएंगे।

हमें इन विकल्पों को बचाना होगा। तारीफ की कीमत का एहसास हर किसी को करना होगा। कोशिश करनी होगी तारीफ के बहाने जैसा उन मंत्री जी के साथ हुआ किसी और के साथ न होए।

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