गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

बधाईयां प्यारे फेसबुक

प्यारे फेसबुक, तुम्हें बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं आठ साल का होने पर। इन आठ सालों में तुमने वो कर दिखाया, जिसे करने में बरसों-बरस लग जाते हैं। महज आठ सालों में ही तुम हमारे बीच इस कदर फेमस हो गए कि आज हर किसी की जुबान पर बस तुम्हारा ही तुम्हारा नाम है। पता है लोग तुम्हें दीवानगी की हद तक चाहते हैं। दिन के चौबीस घंटे तुम्हारे ही दरबार में बीताते हैं। कुछ के लिए तो दिन में कई दफा तुम्हारे दरबार में हाजिरी लगाना बेहद आवश्यक होता है। वे तुम्हारे सबसे पक्के मुरीद हैं। भले ही हमारा बैंक में एकाउंट न हों पर फेसबुक पर जरूर होगा। फेसबुक पर एकाउंट रखना आज की तारीख में हर कोई अपनी शान समझता है। शान समझे भी क्यों नहीं क्योंकि तुमने हमें इस माध्यम के जरिए तरह-तरह के लोगों से ऑन-लाइन मिलने, बतियाने, संवाद और विवाद को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच जो दिया है। इसके अतिरिक्त और चाहिए भी क्या हमें!

तुम्हारे मंच पर आकर हमारे बीच से न जाने कित्ते फेसबुकिए चर्चित कवि और कवित्री बन गए। न जाने कित्तों ने अपनी पहचान कहानीकार और विमर्शकार के रूप में करवा ली। आलम यह है कि उनके लिखे का अब स्थापित वरिष्ठ भी लोहा मानते हैं। लोहा मानेंगे भी क्यों नहीं क्योंकि अब वे यह अच्छे से जान-समझ चुके हैं कि नए लेखकों के आगे उनके दिन हवा हुए। उनकी ठहरी और पुरानी टाइप विचारधारा अब युवाओं के किसी काम नहीं रही। बदलते परिवेश के साथ-साथ फेसबुकिए युवाओं ने अपनी विचाराधारा, सोच और विमर्श को भी अच्छा-खासा बदल डाला है। यही बख्त की आवश्यकता भी है प्यारे।

असल में, प्यारे फेसबुक तुम्हारे मंच का सबसे अधिक लाभ और आनंद उठाया है लवर्स ने। उनके रोमांस के वास्ते सबसे सशक्त माध्यम हो तुम। तुम्हें पता ही होगा कि प्यार करने वालों पर समाज किस-किस तरह की टेढ़ी-मेढ़ी निगाहें रखता है, जरा-जरा सी बातों के ताईं उन्हें रोकता-टोकता है, न दो दिलों को अकेले में मिलने देता है न ही दुख-सुख बांटने। दुनिया और समाज से तंग आकर अब वे तुम्हारे शांत आंगन में आ गए हैं। घंटों के घंटों वे तुम्हारे आंगन में एक-दुसरे से बतियाकर गुजार लेते हैं। ऐसे में बख्त का पता ही नहीं चलता उन्हें। एक-दूसरे से खुलकर एकदम बिंदास बात कहते-करते हैं। कोई अपने लैपटॉप पर लगा रहता है, तो कोई मोबाइल फोन पर। अपनी उपलब्धता को हर जगह उपलब्ध करवाकर तुमने उनका काम बेहद आसान कर दिया है प्यारे फेसबुक। तुम जानते नहीं कि कित्ती किस्म की दुआएं निकलती होंगी तुम्हारे प्रति उनके दिल से। वाकई।

बताइए हर किसी के साथ इत्ता सहयोग और आत्मीय होने के बावजूद कुछ लोग तुमसे जलते हैं। तुम पर तरह-तरह के बैन लादने की वकालत करते हैं। निरंतर तुम्हें आदेश देते रहते हैं कि ये बैन करो कि वो बैन करो। अभिव्यक्ति के बेहतरीन मंच पर इस तरह की बंदिशों को सुनकर मेरे दिल को खासा तकलीफ पहुंचती है। तकलीफ होना लाजिमी है। एक तुम ही तो जो हमारे स्वतंत्र विचारों का एक मात्र सहारा हो। तुम्हारे जैसे खुले विचारों वाले माध्यम ही तो हमारे संवादों को अब तलक जिंदा रखे हुए हैं। तुमने देखा-पढ़ा होगा कि सभी ने अपने-अपने स्तर से तुम पर बंदिशे थोपने का विरोध किया था। लगातार कर भी रहे हैं। तुम जरा भी घबराना मत प्यारे फेसबुक हमारा यह विरोध यूंही जारी रहेगा। तुम्हारे मंच से बिछड़ना अब हमारे बस का नहीं। एक तरह से हमारी ऑक्सीजन जैसे हो तुम प्यारे फेसबुक।

अरे हां सुना है कि तुम्हारा आईपीओ भी आने वाला है। सोशल नेटवर्किंग के रास्ते होते हुए अब तुम स्टॉक मार्केट में भी आ जाओगे। वाह! बधाई प्यारे। अब तो तुम और भी चर्चित हस्ती हो जाओगे। बढ़िया है। लगे रहो। जो हिट है बस वही फिट है। हम तहे-दिल से दुआ करते हैं कि तुम्हारी यह फिटनेस यूंही बरकार रहे। तुम्हारे मंच पर लोग यूंही आते-जाते रहें। तुम्हें अपनाते रहें। तुम्हें अपनी-अपनी अभिव्यक्ति को अभिव्यक्त करने का सहारा बनाते रहें।

तो प्यारे फेसबुक एक दफा तुम्हारे और मार्क जुबेरवर्क को लख-लख बधाईयां।

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