रविवार, 13 नवंबर 2011

जब दिल बहका छम्मकछल्लो पर


प्यारे, दिल का बहकना स्वास्थ के ताईं बड़ा फायदेमंद रहता है। जिनका दिल नहीं बहकता वो बीमार होते हैं। इसलिए, अपन इस प्रयास में रहते हैं कि अपने दिल को कहीं न कहीं बहकाएं रखें। दिल का बहकना मन लगाने का उत्तम साधन है। आजकल अपन इसी काम में लगे हैं। घर-परिवार, देश-दुनिया की प्रत्येक चिंता से मुक्त होकर अपन इसकबाजी में व्यस्त हैं। और, कोई उच्ची-टुच्ची नहीं स्टैंडर्ड की इसकबाजी में।

दरअसल, आजकल अपन छम्मकछल्लो से इसक फरमा रहे हैं। अपने ज्ञान-ध्यान में छम्मकछल्लो के अतिरिक्त फिलहाल कोई नहीं है। पत्नी को भी कुछ समय के लिए विराम पर रख छोड़ा है। कभी-कभार ऐसा इसलिए भी करना पड़ता है ताकि पता लग सके कि अपन का दिल अब भी बहकने की स्थिति में है। और फिर सब जानते हैं कि दिल बहकने की न कोई उम्र होती है न समय। जब मन करे तब बहक जाओ। बिन बहके बहकने का लुत्फ भी कहां पता चलता है प्यारे!
रा. वन में किए छम्मकछल्लो के नृत्य पर अपन सुपर फिदा हैं। ऐसा नृत्य अपन चाहकर भी अपनी पत्नी से नहीं करवा सकते क्योंकि कमर कमर का सवाल है प्यारे। अब जित्ते भी आइटम नृत्य होते हैं, उनमें कमर की भूमिका ही अव्वल रहती है। ऐसी कमर की मादकता को देखकर भला किस मूरख की दिल नहीं बहकेगा! अब किसी से क्यों छिपाना अपन तो सिनेमा हॉल जाते ही आइटम नृत्य देखने के लिए हैं, ताकि कमर की नाजाकत के दर्शन करीब से हो सकें।

अपन इस तथ्य की गारंटी ले सकते हैं कि छम्मकछल्लो से उम्दा कमर कोई दूसरी कट्टो गिलहरी नहीं मटका सकती। अपन ने शीला की कमर भी देखी, मुन्नी की भी मगर जो बात छम्मकछल्लो की कमर में है, वो किसी में नहीं। केवल इस कमर की खातिर ही अपन छम्मकछल्लो के इसक में अपने दिल को बहकाए हुए हैं। और बड़े ही आनंद में हैं। दिन में न जाने कित्ती दफा छम्मकछल्लो के गीत-नृत्य को देख लेते हैं, खुद नहीं जानते। इत्ती दफा तो अपन ने पत्नी ने उस नृत्य को भी न देखा होगा, जो उसने पहली दफा हमारे यहां लेडिज संगीत में किया था।

कुछ भी कहो आइटम नृत्य का अपना ही मजा होता है प्यारे। फिल्म में चाहे कुछ हो या न हो परंतु आइटम नृत्य तो जरूर ही होना चाहिए ताकि दिल बहला रहे। वैसे इस प्रकार के सभ्य आइटम नृत्यों को नई दिशा और दशा देने में राखी सावंत की अहम भूमिका रही है। हीरोइनें तो तब भी आइटम नृत्य करने में थोड़ा-बहुत सकुचा जाती हैं किंतु राखी सावंत के साथ ऐसा नहीं है। आइटम को हॉट बनाने की कला राखी को अच्छे से मालूम है।

देखा इसे ही कहते हैं दिल का बहकना। बात छम्मकछल्लो की हो रही है लेकिन राखी को भी कहां भूले हैं। वैसे ऐसी कमसिनों के बीच रहकर क्या भूलूं क्या याद रखूं वाला सवाल होना भी नहीं चाहिए प्यारे। इसक एक से फरमाओ या दस से निभाने का तरीका आना चाहिए बस।

फिलहाल, छम्मकछल्लो के इसक में पड़े रहना दिल-दिमाग को सुकून दे रहा है। अपन अब इस सुकून को किसी हालत छोड़ना नहीं चाहते। क्या करें, अपन का दिल भी थोड़ा बेशर्म-सा हो गया है बिन बहके संभलता ही नहीं। चाहता है एक ही समय में कई-कई के साथ इसक फरमा ले। इसको बहलाए रखने के लिए कभी अपन को छम्मकछल्लो का आइटम नृत्य देखना पड़ता है, तो कभी कट्टो गिलहरी का।

अपन तो आप सब से भी कहते हैं कि अपने-अपने दिल को बहलाए रखिए। किसी छम्मकछल्लो को दिल दे दीजिए और फिर चैन की बंसी बजाइए।

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