शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

सात अरब होने की खुशी

लो जी अब हम सात अरब हुए। तालियां बजाइए। सात अरब होकर भी हम खुश हैं। अपनी खुशी का इजहार हमने सात अरबवें बच्चे के जन्म पर मिठाई खा-बांटकर किया। लगा ही नहीं जैसे निरंतर बढ़ती जनसंख्या हमारे ताईं कोई चिंताजनक मुद्दा हो। अगर हो भी, तो भी हम क्या कर लेंगे? कौन-से सुधर जाएंगे? दरअसल, ऐसी चिंताओं और सुधारों को तो हम जेब में डालकर घुमते हैं। जेब में अगर न डालें तो ये चिंताएं और सुधर हर वक्त हमारे दिमाग का दही किए रहेंगी। हमारे कने वैसे ही इत्ती चिंताएं हैं, उस पर जनसंख्या की चिंता और पाल लें। ऐसे तो हमारे पागल होने में जरा भी देरी नहीं लगेगी प्यारे।

सोचो तो सात अरब होना अपने आप में बहुत बड़ी बात लगती है। और, कित्ती मेहनत के बाद हमने इस मजेदार आंकड़े को छुआ है, यह कोई हमसे पूछे। भले दुनिया कित्ती ही चिल्लाती रही कि जनसंख्या को नियंत्रित करो, नियंत्रित करो मगर हम कहां मानने वाले हैं। अपनी पहुंच, अपनी हैसियत से आगे जाकर हमने इस क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल किया है। हमें शाबासी दीजिए। हम दो, हमारे दो के फार्मूले को हमने केवल विज्ञापनों में ही जीवंत बनाए रखा है। इन विज्ञापनों से जिन्हें जागृत होना हो वे होएं, हम ऐसे ही ठीक हैं।

केवल समझ-समझ का फेर है। भई, जिस देश के कने जनसंख्या को झेलने के पर्याप्त संसाधन होंगे, वो भला क्यों कंट्रोल करने-करवाने को कहेगा। उसके कने जित्ते लोग होंगे वो खुद को उत्ता ही मजबूत महसूस करेगा। प्यारे, यह तो सब जी भरमाने की बातें हैं कि जनसंख्या का बढ़ना खतरे का सूचक है। अगर यह होता तो दुनिया अभी तलक सात अरब पर भी जीवित नहीं बची होती! सात अरब होकर भी हम मस्त हैं। खुशहाल हैं। और, भरपूर जी रहे हैं। इससे ज्यादा और क्या चाहिए हमें!
यह तो हाल है कि जब सात अरबवां बच्चा दुनिया में आया तो हर कहीं होड़-सी मच गई अपने-अपने बच्चे को सात अरबवां घोषित करने की। वो तो सौभाग्य से दो बच्चे ही इस खिताब को पा सके। ऐसा ही कुछ तब भी हुआ था, जब हमारे बीच मिलेनियम बेबी आया था। दुनिया भर में उसके आने पर खुशी मनाई गई थी। अखबारों ने बड़ी-बड़ी तस्वीरें छापीं थीं। हर कहीं बस मिलेनियम बेबी की ही धूम थी। उस दौरान भी बढ़ती जनसंख्या पर चिंता जताई गई थी। लेकिन अब तलक कुछ हुआ क्या? यहां जनसंख्या के बहाने रिकार्ड बनाए जा रहे हैं और वहां चिंता पर चिंता जताई जा रही है। पर, कोई सुने-समझे-माने तब न।

प्यारे, अभी तो हम सात अरब ही हुए हैं, आगे यह आंकड़ा दस अरब के पार पहुंच जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं। क्योंकि इस देश-दुनिया में सबकुछ संभव है। यहां रिकार्ड बनते ही पिछले रिकार्ड तोड़ने के लिए हैं। तो टूटने दीजिए न रिकार्डें को आप काहे टेंशन में टल्ली हुए जाते हैं। मिठाई खाइए और खुशी होने पर ताली बजाइए। फिलहाल, कंट्रोल को विराम दीजिए। जय हो।

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