बुधवार, 14 सितंबर 2011

भ्रष्टाचार के पैर

अन्नाजी का तहे-दिल से शुक्रिया।

अब हमें भ्रष्टाचार के पैर साफ नजर आने लगे हैं। आए दिन अखबारों में प्रकाशित खबरों में किसी न किसी भ्रष्टाचारी का पैर अलां-फलां भ्रष्टाचार में फंसा पढ़ने को मिल ही जाता है। अब तलक जो भ्रष्टाचारी अपने पैरों को सबसे मजबूत मानते-समझते थे, एक-एक कर वे सब सतह से उखड़ने लगे हैं। और ऐसे उखड़े हैं कि लगता नहीं पुनः अपने पैरों को मजबूत कर पाएंगे। सब अन्ना के आंदोलन का प्रताप है।

ऊंट को पहाड़ के नीचे आते देखने का सुख क्या होता है, अब जाकर पता चला।

अन्ना न अनशन करते, न आंदोलन होता, न जनता जुटती, न मोमबत्तियां जलतीं, न सरकार झुकती और न ही भ्रष्टाचार के दबे-छिपे पैर सामने दिखते।

अभी-अभी रेड्डी बंधुओं और अमर सिंह के पैरों का उखड़ना अपने आप में सहज होकर भी उन्हें असहज ही लगा होगा। क्योंकि इस तरह की असहजता को न रेड्डी बंधुओं न अमर सिंह ने अपने ताईं कल्पना में भी न सोची होगी।

इधर रेड्डी बंधुओं के पैर क्या उखड़े कर्नाटक के साथ-साथ राजधानी की भाजपा में भी अंदरखाने बहुत कुछ उखड़ने-बिखने-सा लगा है। जिन्हें कभी रेड्डी बंधुओं के साथ अपनी यारी-दिलदारी पर नाज था, आज वे सभी बेहद नासाज हैं। उनमें से बहुत से तो नाराज भी हैं। पर असल समस्या तो यही है कि अपनी नाराजगी को जन-जाहिर करें भी तो कैसे? डर है उनके प्रति कहीं जनता अखड़ गई तो!
अमां अपन तो सुन-पढ़कर ही दंग रह गए कि रेड्डी बंधुओं के कने भ्रष्टाचार की पूरी खान है। इधर हाथ डालो तो सोना, उधर हाथ डालो तो हीरा। बंधुगण लाख रुपया की बैल्ट पहनते थे और स्वर्णजड़ित कुर्सी पर विराजते थे। फिर भला कैसे उनके मजबूत पैर सरकार को दिखाई पड़ते! वो तो देखकर भी अनदेखा ही किए रही होगी अब तलक। लेकिन अपने अन्ना की आंधी ऐसे मजबूत पैरों को एक-एक कर बहाए लिए चली जा रही है। कह सकते हैं कि भ्रष्टाचार के पैरों की शामत-सी आ गई है।

लगभग यही हाल अपने पुराने समाजवादी अमर सिंह का है। गए वक्त में फिल्म, उद्योग और राजनीति की दुनिया के वे अकेले सरताज थे, इशारे पर सबको नचाने की ताकत रखते थे, मगर अब उनके कने न ताज रहा न ताकत। अब तिहाड़ की सलाखें हैं और वे हैं।

इंतजार करें..अभी तो ऐसे बहुत-से नायकों का सामना आना बाकी है मेरे दोस्त। तमाम सरकारी, गैर-सरकारी दफ्तरों में जिन 'परिचित पैरों' को अब तलक हम अंडर द टेबल ही छुते-दबाते रहे, उन्हें भी अब डर-सा लगा रहता है कि कब, कौन, कहां उनके पैरों को भी न उखाड़ दे।

बहरहाल, अब तलक जितने भ्रष्टाचारियों के पैर उखड़ चुके हैं, देखते हैं, अब अपनी सफाई में वे किन पैरों को सामने करते हैं!

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