मंगलवार, 13 सितंबर 2011

तिहाड़ उनकी ऋणी है

दिनों तिहाड़ जेल का वातावरण आनंदमय है। बेशक बाहर गर्मी-बरसात का दिक्कतें हो पर यहां सबकुछ कूल-कूल है। दिन कब में और कहां गुजर जाता है पता ही नहीं चलता। पता चले भी कैसे, क्योंकि तिहाड़ के भीतर आजकल बड़ी-बड़ी मशहूर हस्तियां जो मौजूद हैं। यकीनन यह तिहाड़ का सौभाग्य ही है कि उसे ऐसी मशहूर हस्तियों का संग-साथ मयस्सर हुआ। तिहाड़ सलाखों सहित उनकी ऋणी है।

यहां हर बैरक अपनी-सी अद्भूत कहानी लिए हुए है। एक तरफ कलमाड़ी जी अपने खेल में मस्त रहते हैं तो दूजी तरफ ए. राजा जी अपने स्पैक्ट्रम के हिसाब-किताब में व्यस्त। कनिमोझी के कने कविताओं की व्यस्तता है। मतलब कि यहां खाली कोई नहीं है। सबके कने अपने-अपने खास काम हैं। खाली रहना भी नहीं चाहिए क्योंकि ज्ञानी कह गए हैं कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है।
दरअसल, व्यक्ति के मन को पहचानने का सबसे उत्तम स्थान जेल ही है। जेल के भीतर ही व्यक्ति का असली व्यक्तित्व सामने आ पता है। माना कि इन मशहूर हस्तियों ने बाहर बहुत-से घपले-घोटाले किए मगर जेल के भीतर वे हर प्रकार की बुरी आदतों से दूर हैं। आजकल खुद को बेहतर इंसान बनाने में जुटे हुए हैं। मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं।

बंधु, बड़े ही नसीब वाले होते हैं वे, जिनके कने जेल की हवा और रोटी खाना व चक्की पिसना लिखा होता है। इतिहास उनके इस त्याग का गवाह बनता है। यह बड़ी बात है।

खैर, उनके जेल जाने के पीछे उद्देश्य जो भी रहा हो परंतु निभाया तो उन्होंने नैतिक फर्ज ही है न! इस फर्ज को निभाने के अतिरिक्त उनके कने कोई चारा भी नहीं था खुद को बचाने का। बाहर की चिल्ल-पौं और आरोप-प्रत्यारोप से कहीं बेहतर है जेल की बैरक। अंदर कम से कम ये मशहूर हस्तियां हर पल की सांस तो चैन से ले ही रही हैं।

चैन की सांस लेने अब हमारे पूर्व समाजवादी श्री अमर सिहंजी भी पहुंच गए हैं। उन्हें ऐसे शांतिपूर्ण माहौल की जरूरत भी थी। अभी हाल वे आपरेशन के कठिन दौर से गुजरकर चुके हैं। कुछ दिन तिहाड़ में रहेंगे, पुराने संगे-साथियों से मिले-जुलेंगे सब ठीक हो जाएंगे। हमारे ताईं वे और उनका स्वास्थ्य अति-महत्वपूर्ण है। धन्य हुई तिहाड़ उनको पाकर।

हम तो चाहते हैं कि ये मशहूर हस्तियां ऐसे ही तिहाड़ में बनी रहें। तिहाड़ की शोभा बढ़ाती रहें। साथ ही इनसे वे लोग भी सबक हासिल करें, जो इनके जैसे ही कामों में बाहर संलिप्त हैं। कभी पुलिस के हत्थे चढ़ गए, तो उनके वास्ते भी यही सबसे श्रेष्ठ जगह होगी।

क्या आपको नहीं लगता कि अन्ना की मुहिम का रंग धीरे-धीरे कर असर दिखाने लगा है।