बुधवार, 28 सितंबर 2011

देश के गरीबों के नाम पाती

सुनो प्यारे गरीबों,
प्रसन्न हो जाओ। घी की मोमबत्तियां जलाओ। मोतीचूर के लड्डू बांटो। क्योंकि तुममें से अब कोई गरीब नहीं रहा! अब तुम और तुम्हारे जैसा अन्य गरीब अब अमीर है। चूंकि तुम्हारी कमाई पच्चीस रुपए से ज्यादा है इस नाते तुम अमीर हो। दरअसल, हमारी प्रगतिशील सरकार के उत्तर-आधुनिक योजना आयोग ने गरीबी की परिभाषा को ही अब बदल दिया है। जिसकी कमाई 32 और 25 रुपए से ज्यादा है, वो अमीर है। यानी कम में अमीर बनने का सुख क्या होता है, इसे तुम अब कदम-कदम पर महसूस किया करोगे। बधाई हो प्यारे!
अरे, तुम्हें तो हमारे योजना आयोग को करबद्ध होकर प्रणाम ठोकना चाहिए कि उसने तुम्हें अमीरियत का स्पष्ट एहसास करवाया। तुम्हारे गरीब जज्बातों का पूरा ख्याल रखा। तुम अमीरों के बीच खुद को डर्टी फील न करो, इस फीलिंग को नस्तेनाबूद किया। भला ऐसा नेकदिल योजना आयोग कहीं किसी देश में होगा जैसा कि अपने देश में है।

वाकई गरीब और गरीबी देश के ताईं कलंक समाने हैं। इससे देश के साथ-साथ सरकार का भी मान घटता है। अमेरिका जैसे देश यह सोचते होंगे कि सरकार अपने देश के गरीबों के वास्ते कुछ करती ही नहीं। देश की गरीबी और गरीबों पर हमारी सरकार को अक्सर यहां-वहां सफाई पेश करनी पड़ती है। सो, योजना आयोग ने इस सफाई का अब झंझट ही खत्म किया। उसने कम में देश के गरीबों को अमीर बनाकर एक बड़ी मिसाल पेश की है। अब जब अमेरिकी कांग्रेस भारत पर कोई रिपोर्ट लिखेगी, तो हमारे योजना आयोग की काबिलीयत का जिक्र वहां सर्वप्रथम होगा। साथ ही विपक्ष के लिए भी यह करार जवाब साबित होगा।

इस परिभाषा पर जिन्हें मुंह मसोसना हो वे मसोसें परंतु देश के गरीब बेहद प्रसन्न (!) हैं। घर बैठे ही वे जरा से रुपयों में अमीर हो लिए यह क्या कम बड़ी बात है उनके ताईं। आज के इस महंगाई भरे दौर में कम में अमीर होना बहुत कठिन है प्यारे। लेकिन योजना आयोग ने इसे कर दिखाया। देश के गरीब उनके प्रति दिल से ऋणी हैं।

चूंकि अपने देश से गरीब और गरीबी समाप्त हो चुकी है, इस नाते हम उम्मीद करते हैं कि अब यहां न कोई किसान आत्महत्या करेगा, न किसी का कंगाली में आटा गीला होगा, न गरीब की बेटी घर में बैठेगी, न किसी को रोटी के लाले होंगे। हर तरफ समृद्ध, पैसा और अमीरपना होगा। सरकार के लिए भी यह राहत की बात होगी कि कोई गरीब उसके दर पर अब फरियाद लेकर नहीं आएगा।
तो प्यारे गरीबों, अपनी गरीबी से मुक्त समझो और झूम के नाचो-गाओ ताकि सरकार भी सुन सके।

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