मंगलवार, 13 सितंबर 2011

ब्लास्ट के बाद

धर दिल्ली में ब्लास्ट हुआ और उधर खामाखां ही इश्यू बन गया। यार इश्यू बनाने के लिए थोड़े ही न उन्होंने (आतंकवादियों) ब्लास्ट किया था। और फिर ब्लास्ट तो उन्होंने किया था, बुरा-भला उन्हें कहें, आप और विपक्ष मिलकर नाहक ही हमारी प्रगतिशील सरकार को कोस रहे हैं। यह कोई बात थोड़े न हुई यार!
क्या सरकार हर वक्त यही देखती रहे कि कहां ब्लास्ट हुआ, किसने किया, क्यों किया, किसलिए किया? ब्लास्ट में कहां कित्ते मरे गए और कित्ते हताहत हुए? सरकार के कने और भी कई जरूरी काम हैं। जनहित के वास्ते तमाम योजनाएं-परियोजनाएं बनाने को पैंडिंग पड़ी हैं। विकास दर को भी देखना है। अभी महंगाई को भी काबू में करना बाकी है। भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसनी है। साथ ही अपना और मंत्रियों का घर भी देखना-भालना है। क्या जानते नहीं कि हमारी सरकार अभी-अभी एक बड़े ही जटिल आंदोलन से पार पाके चुकी है। जैसे-तैसे अन्ना जी को समझा-बुझाकर मामले को शांत करवाया है। और एक आप हैं कि सरकार से ब्लास्ट क्यों हुआ, कैसे हुआ जैसे गैर-जरूरी प्रश्न पूछने पर आमादा हैं। यह ठीक नहीं है।

यार, जब आपको सरकार बनना पड़ेगा , तब पता चलेगा कि सरकार चलाना क्या होता है? सरकार को तमाम तरह के राजनीतिक दवाबों में रहकर काम करना पड़ता है। कभी इसकी सुन्नी पड़ती है, तो कभी उसकी। जिसके काम आओ उसके बुरे। बंधु, सरकार होना कित्ते जिगरे का काम है, आपको क्या मालूम! आप तो बस...

ठीक है.. ठीक है.. ब्लास्ट की धमक सरकार के कानों तक भी पहुंच चुकी है। अभी वो सारे माजरे को देख समझ रही है। प्राथमिक स्तर पर जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। सरकारी फरमान पर दिल्ली समेत हर राज्य, हर प्रदेश, हर शहर, हर गांव, हर गली-मोहल्ले तक में हाई-अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सूंघने वाले कुत्तों को काम पर लगा दिया गया है। जगह-जगह के मेटल डिडक्टर और सीसीटीवी कैमरे पोंछे ठीक किए जा रहे हैं। बसों-रेलों-हवाईजहाजों आदि-आदि को छाना जा रहा है। जिसे जहां जो भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति नजर आवे झटसे पुलिस या सरकार को सूचित करें। यकीन करें एक्शन तुरंत होगा। हमारी हर वक्त मुस्तैद रहने वाली पुलिस हर कहीं लगी हुई है। निश्चिंत रहें कार्य प्रगति पर है।

कान खोलकर सुन लीजिए सरकार विपक्ष इस वक्त कोई भी चुप नहीं बैठा है। यह निंदा का समय है। सभी दल और मंत्रीगण अपनी-अपनी तरह और तरीके से ब्लास्ट की निंदा करने में व्यस्त हैं। जिसे जहां जगह मिल रही है, वहां जाकर अपनी निंदा को अभिव्यक्त कर रहा है। ब्लास्ट पर देशभक्तिपूर्ण बयानों का आना शुरू हो चुका है। किसी के निशाने पर सरकार है, तो किसी के गृहमंत्री। अंदरखाने इस-उस के इस्तीफों की आवाजें भी उठने लगी हैं। जनहित में कुछ नेता-मंत्री हस्पतालों के भी चक्कर काट आए हैं। राहुल बाबा भी गए थे पर उन्हें मायूसी में वहां से रूखस्त होना पड़ा। मतलब कि ब्लास्ट पर सरकार, विपक्ष और नेताओं के बीच कुछ कुछ चल जरूर रहा है।

प्रधानमंत्री जी ने साफ कह दिया है कि चाहे जो हो जाए पर घुटने नहीं टेकेंगे। सख्त से सख्त कार्रवाई का भरोसा उन्होंने जताया है। अब आपको चाहिए कि आप उनके भरोसे पर भरोसा रखें क्योंकि यही वक्त की मांग है। अपनी अक्ल दौड़ाएं, दौड़ने के लिए सरकार और प्रशासन के कने तमाम लोग हैं। हां दिल बहलाने को थोड़ी-बहुत भर्त्सना चलेगी।

सरकार हमारी भली है। प्रगतिशील है। सब मैनेज कर लेगी। इत्ते सालों से कैसे कर रही है आपको पता ही है। सरकार को अधिक डिस्टर्ब करें। अन्य कामों के साथ-साथ वो ब्लास्ट और ब्लास्ट करने वालों को भी देख लेगी। मालूम होगा कि सरकार ने मुआवजे का ऐलान कर ही दिया है। सरकार के ताईं मुआवजा राशि ही हर मर्ज और दर्द का इलाज है शायद!
बहरहाल, आप जनता से गुजारिश है कि चुप रहें। क्योंकि जब जनता बोलती है तो सरकारों को बुरा लगता है। जैसाकि अभी भ्रष्टाचार के मसले पर लगा था। ऐसा ही अक्सर उसे कसाब और अफजल गुरु के मसले पर भी लग जाता है।

लेकिन एक डर मेरे मन में उठने-सा लगा है कि कहीं भ्रष्टाचार के मुद्दे की तरह अब आतंकवाद को लेकर कोई दूसरा अन्ना कहीं धरने या अनशन पर बैठ जाए। सरकार को इस डर को समझना चाहिए।
 

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