शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

इत्ता विरोध भी ठीक नहीं प्यारे

बेचारी सरकार भी क्या करे। उसकी भी मजबूरियां हैं। उसकी भी परेशानियां हैं। किन आर्थिक दवाबों के बीच सरकार को पैट्रोल की कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं इसे आप क्या जानें! आपको तो बस सरकार के विरूद्ध विरोध का बहाना मिलना चाहिए। मेरे प्यारे, सरकार का विरोध करने से पहले जरा सोच-समझ तो लो कि विरोध क्यों और किस आधार पर कर रहे हो? एक तो सरकार के कने वैसे ही इत्ती परेशानियां हैं ऊपर से आप विरोध कर उसकी परेशानियों को और बढ़ा रहे हैं। यह ठीक नहीं है।

आपके विरोध का कारण बस इत्ता-सा है न कि सरकार ने पैट्रोल के दाम क्यों बढ़ाए? अरे प्यारे, यह भी कोई बात हुआ भला कि क्यों बढ़ाए! वह हमारी सरकार है। हमारी मालिक है। जो मन में आए कर सकती है। दाम बढ़ा सकती है। दाम घटा सकती है। मेरे प्यारे, सरकार को कोई शौक थोड़े ही है जनता के जज्बातों से खेलने का। लेकिन जब तमाम प्रकार के राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दवाब सामने हों तो सरकार को यह सब करना पड़ता है। और फिर हमारी सरकार ने कोई अनोखा थोड़े ही किया है पैट्रोल के दाम बढ़ा कर! दूसरे देशों की सरकारें भी ऐसा करती रहती हैं।

मुझे एक बात समझ नहीं आती। जित्ता वक्त हम-आप सरकार को कोसने या विरोध करने में जाया करते हैं अगर उत्ता ही समय सरकार की मजबूरियों-परेशानियों को समझने में लगाएं तो कित्ता अच्छा हो। हर वक्त विरोध हर कहीं से विरोध। विरोध को तो हमने स्कूली इमला बना लिया है, जब मन आता है रटने बैठ जाते हैं। आखिर ऐसा कब तलक चलेगा प्यारे।

प्यारे, हमें तो अपनी यूपीए सरकार का हमेशा एहसानमंद रहना चाहिए कि उससे अधिक समझदार व प्रगतिशील सरकार हमें अभी तलक मिली ही नहीं! आम आदमी के हाथ पर गजब की पकड़ रखती है हमारी सरकार। कित्ता कुछ हमें सरकार से सीखने को मिला है। कई आदतें उसने हमें ऐसी डलवा दी हैं कि अब हम उनके आदी से हो गए हैं। भ्रष्टाचार, घपला, घोटाला, महंगाई आदि-आदि सब आदतें ही तो हैं। इन सब के बीच रहकर भी इन्हें कैसे झेला जाए यह हमारी सरकार ने ही हमें बताया है। और प्यारे आप हमेशा उसके खिलाफ बगावत पर उतरारू रहते हैं। अपने को संभालिए बंधु।

दरअसल, पैट्रोल की कीमतें तो सरकार ने इसलिए बढ़ाई हैं ताकि हमें महंगाई को झेलने की आदत पड़ी रहे। इधर कई दिनों से महंगाई के बढ़ने का कोई खास जिक्र भी नहीं हुआ था हमारे बीच। चलो अब पैट्रोल के बहाने ही सही कम से कम महंगाई हमारी चिंता और चिंतन में तो आई। हम तो ऐवईं महंगाई को उपेक्षित से किए हुए थे।

प्यारे माहौल को समझो। खाली-पीली विरोध न करो। सरकार सब जानती है। अभी कीमतें बढ़ाई हैं, तो कल को घटा भी देगी। बस थोड़े दिनों की बात और है। चुनाव होने वाले हैं बस देखते रहियो कि सरकार तुम्हें और जनता को क्या-क्या कीमती तोहफे देती है!

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