बुधवार, 14 सितंबर 2011

करोड़पति नेता की जरूरत

मियां, इसमें इत्ता उखड़ने की क्या जरूरत है अगर हमारे देश के कुछ नेता करोड़पति हैं? क्या नेता का करोड़पति होना किसी 'विशेषाधिकार हनन' के तहत आता है? जब आप और हम करोड़पति हो-बन सकते हैं, तो फिर नेता क्यों नहीं? आपको अपना करोड़पति होना 'संघर्ष का प्रतीक' लगता है और उनका करोड़पति होना 'राष्ट्रीय शर्म'। वाह! जनाब यह भी कोई बात हुई भला।

न भूलें वे हमारे नेता हैं। हमारी सरकार हैं। हमारे मालिक हैं। दिन-रात हमारी सेवा में खपकर तरह-तरह की योजनाएं-परियोजनाएं बनाते हैं। जनहित में लगे रहने को वे अपना फर्ज मानते हैं। संसद के अंदर-बाहर जोर का शोर मचाते हैं ताकि हम उनके काम करने के तरीके को सुन, समझ व देख सकें। जनता के प्रति इत्ता पसीना बहाने के बाद अगर वे आएं-बाएं-दाएं से कुछ लाख या करोड़ रुपया जमा कर भी लेते हैं, तो मियां आपके पेट में क्यों मरोड़ें पड़ने लगती हैं! कमाई के प्रति जित्ता मोह आपके दिल में है लगभग उत्ता ही उनके भी। बस आपमें और उनमें फर्क इत्ता-सा है कि आप जोड़कर कमाते हैं और वे जुगाड़कर।

कायदे में हमें तो प्रसन्न होना चाहिए कि हमारे देश (इंडिया) के नेता-मंत्री अमीर हैं। अमीर होकर भी वे कित्ते सहज हैं। अपनी अमीरी का खुलासा उन्होंने तब ही किया जब उनसे ऐसा करने को कहा गया। वरना उन्हें क्या पड़ी है जनता के बीच अपनी अमीरी दिखाने की! उनके बीच महान बनने की! लेकिन हम उनके इस त्याग (संपत्ति के खुलासे) को ऐढ़ी निगाह से देख रहे हैं। सबसे ज्यादा देख-दिखा है हमारा मीडिया। खबरिया चैनलों पर हर वक्त बस यही खबर दौड़ रही है कि फलां मंत्री इत्ता अमीर है तो अलां इत्ता। इसके कने इत्ता सोना है तो उसके कने इत्ती जमीन। पता नहीं यह मीडिया देश के नेताओं-मंत्रियों से जला-जला-सा क्यों रहता है?
अभी सरकार संपत्ति की घोषणा करने को आम आदमी से कह दे फिर देखिए यहां कित्ता हाहाकार मचता है। सड़कों-चौराहों पर सरकार के खिलाफ कित्ते धरना-प्रदर्शन होंगे। पुतले फूंके जाएंगे। प्रत्येक की जुबान पर बस एक ही प्रश्न होगा कि आखिर सरकार को क्या पड़ी है आम आदमी से उसकी कमाई या संपत्ति का खुलासा करवाने की? यह तो आम आदमी के अधिकारों का हनन हुआ। बहुत बढ़िया मियां जब अपनी बारी आई तो आपको अधिकारों का हनन याद आया। यह तो साफ दोगलापन हुआ न।

मियां, हर नेता-मंत्री एक जैसे नहीं होते। उनमें से अगर कुछ करोड़पति हैं, तो कुछ बे-कार और बे-घर भी। मगर आज तलक उन्होंने आपसे अपनी गरीबी का रोना तो नहीं रोया न। तो फिर क्यों आप उनकी संपत्ति व कमाई को लेकर इत्ता दुखी हैं। नेता अगर राजनीति में है तो कमाएगा नहीं क्या? क्या हर सुख-सुविधा का लुत्फ आप ही उठाएंगे? नेताओं-मंत्रियों का अमीर होना बताता है कि अपने देश की राजनीति कित्ती समृद्ध है। अपने देश को सोने की चिड़िया कहलाने का कुछ मान तो बचाकर रख लेने दीजिए उन्हें भी।

बेहतर यही होगा कि आप नेताओं-मंत्रियों की संपत्ति पर ज्यादा ध्यान देकर अपनी संपत्ति की चिंता करें। जिस तरकीब से वे कमा रहे हैं आप भी वैसे ही कमाएं। देश की आर्थिक तरक्की ही हमारा पहला और आखिरी उद्देश्य होना चाहिए। अब यह उद्देश्य कैसे और किस रास्ते पूरा हो रहा है इस पर खाक डालिए। और हां नेताओं का करोड़पति होना वक्त की जरूरत है, समझे मियां।

कोई टिप्पणी नहीं: