गुरुवार, 11 अगस्त 2011

सेंसेक्स की लुढ़कती सेहत

प्रि सेंसेक्स, यह तुम्हारी सेहत को क्या हो गया है? क्या हालत बना ली है तुमने अपनी। बस हर रोज लुढ़के ही चले जा रहे हो। तुम्हारा लुढ़कना हमारे दिलों में घबराहट पैदा कर रहा है। हम आशंकाओं पर आशंकित-से हुए जाते हैं। दिन-रात बस यही चिंता खाए जा रही है कि क्या होगा अगर तुम्हारी सेहत ऐसे ही लुढ़कती रही? तुम जानते नहीं तुम्हारी सेहत पर हमारा कितना कुछ निर्भर करता है। तुम स्वस्थ हो तो हम स्वस्थ हैं। तुम प्रसन्न हो तो हम प्रसन्न हैं। तुम्हारी तकलीफ भी हमारी ही तकलीफ है।

हमें इस बात का बेहतर इल्म है कि तुम कितने संवेदनशील प्राणी हो। जरा-जरा सी निगेटिव खबरों पर बिफर जाते हो। फिर ऐसे बिफरते हो कि संभाला मुश्किल पड़ जाता है। न जाने कितनी ही दफा खुद वित्तमंत्री को तुम्हें संभालने आना पड़ा है।

भला कैसे भूल सकते हैं हम तुम्हारी उन पिछली बिफराहटों को। पलभर में तुमने सबकुछ को नेस्तेनाबूद कर दिया था। सड़क पर ले आए थे तुम प्रत्येक आमो-खास निवेशक को। तुम्हारे न उबर पाने के सदने में हमारे बीच से न जाने कितने ही संगी-साथी परलोक सिधार लिए अब तो इसका कोई पक्का हिसाब-किताब भी नहीं मिलता।

इस दफा भी तुम अपनी पुरानी डगर पर ही चल निकले हो। लेकिन इस बात की हमें खासा तकलीफ है कि सरकार अभी तलक तुम्हारी तरफ से नहीं चेती है। सरकार महंगाई की सेहत पर तो चिंतित है परंतु तुम्हारी सेहत का ख्याल अभी तलक उसे नहीं आया है। महंगाई पर संसद में बहस हो रही है और तुम पर कोई बात ही नहीं कर रहा। यह तुम्हारे प्रति घोर अपमान का विषय है। बताइए जिस सेंसेक्स पर समूची गुलाबी अर्थव्यवस्था का भार है, जिसके बहाने विदेशी निवेशक हमारी अर्थव्यवस्था पर कुर्बान हैं, उसकी लुढ़कती सेहत की फिक्र करने वाला न सरकार के बीच कोई है न वित्त-मंत्रालय के।
सेंसेक्स की लुढ़कती सेहत का पूरा फायदा सोना-चांदी जमकर उठा रहे हैं। जिस प्रस्थान बिंदू पर कभी हमारा सेंसेक्स हुआ करता था, वहां पर आज सोना है। चांदी का कहना ही क्या वो तो हर बिंदू को पार कर और भी ज्यादा बिंदास हो गई है।

लेकिन ध्यान रखें सोने-चांदी की यह दबंगई सेंसेक्स के प्रति ठीक संदेश नहीं है। सेंसेक्स के दिमाग की अगर जरा-सी भी हिल गई तो सब दबंगईयां धरी की धरी रह जाएंगी। इस वक्त हमें यही सबसे बड़ा डर है। हम चाहते हैं कि सेंसेक्स दबंग न बने। साथ ही अमेरिकी मंदी का जो फितरती संकट आन खड़ा हुआ है, यह भी सेंसेक्स की सेहत के प्रति सबसे बड़ा लोचा है। हम चाहते हैं कि इस बारे में सरकार कुछ करे। महंगाई की चिंता को हाल-फिलहाल कोने में सरकाकर पूरी तरह से सेंसेक्स की सेहत को संभालने में लग जाए। क्योंकि सेंसेक्स की चुस्त-दुरूस्त सेहत के बल पर ही हमारी अर्थव्यवस्था का गुलाबीपन बरकरार रह सकता है!

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