शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

सोने की चमक में चेन चोरों की चांदी

प्यारे सोने, तुम दिन-दूनी राती-चौगनी रफ्तार से यूंही बढ़ते रहो। तुम बढ़ते हो तो मेरे मोहल्ले के चेन चोरों को काम मिला रहता है। वे दिन-रात कभी इसकी तो कभी उसकी चेन खेंचने में व्यस्त रहते हैं। इस बहाने तुम उन बेचारों का परिवार पाल रहे हो तुम्हारा यह एहसान क्या कम है उन पर! दोस्त वही जो जरूरत पर काम आए। आज के बिगड़ैल समय में ऐसे नेकदिल दोस्त भला कहां मिलते हैं।

प्यारे चेन चोरों, तुम दुनिया की चिंता न करो। इसका काम तो कहना है। यह कहती रहेगी। बिन कहे इसकी रोटी भी कहां हजम होती है। बस तुम खामोशी के साथ अपने काम को अंजाम देते रहो। यही सबसे बेहतरीन मौका है। इस वक्त प्यारे सोने के दाम आम की पहुंच से पीछे और खास की पहुंच में हैं। खास वर्ग जमकर सोने पर पैसा लुटा रहा है। उसे ऐसे ही लुटाने दो। सोना जितना चमकेगा खास वर्ग उतना ही रिझेगा। तुम तो कैसे भी उसके रिझने का फायदा उठाए रहो।

निरंतर देख-पढ़ रहा हूं कि चेन चोरी हमारे चोर भाईयों का सबसे प्रॉफिट का काम बनती जा रही है। हालांकि यह है तो काफी जोखिम और मेहनत भरा काम लेकिन एक दांव में ही वारे-नियारे हैं। वाईमिस्टेक आप चेन चुराते पकड़े भी जाते हैं तो घबराने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि हरी पत्ती के आगे हर पकड़-धकड़ बेमानी है। मेरे ही शहर में अब तलक न जाने कितनों की चेन पर हाथ साफ हुए हैं परंतु पकड़ा एक भी चेन चोर नहीं गया। हालांकि चेन चोरों को पकड़ने के लिए हमारी पुलिस अब भी प्रयासरत है। उनके प्रयास जारी रहें।

कायदे में चेन के न चुरने का ख्याल तो चेन पहनने वाले को रखना चाहिए। जब मालूम है कि सोने के दाम आसमान पर हैं और चोर भाईयों की भी नजरें ललचाई हुई हैं, तो आप चेन पहनकर निकलती ही क्यों हैं? बावजूद इसके अगर आपको सोने की चेन पहनकर फैशन करने का इत्ता ही शौक है, तो अपने घर में करिए न। कौन रोकता है। सोना पहनकर बाहर निकलेंगी तो हादसा होना संभव ही मानिए। फिर चोर भाई अपने आप को रोक नहीं पाएंगे। आखिर उन्हें भी आगे जवाब देना होता है। मैं तो कहता हूं कि चेन चोरी के लिए चेन चोरों को ही जिम्मेवार ठहराना गलत है, इसके लिए पहनने वाला ही सबसे बड़ा दोषी है।

देखिए, सोना तो सोना ही है। चाहे वो छब्बीस हजार हो जाए या छब्बीस सौ उसका रूतबा कभी कम न होगा। सोना जितना पसंदीदा महिलाओं के बीच है, लगभग उतना ही चोर-उचक्कों के बीच भी। अगर दोनों ही सोना पाने के संघर्ष में लगे रहते हैं, तो हमें या पुलिस वगैहरा को उनके इस कंपटीशन के बीच नहीं पड़ना चाहिए। अपने हाथ व सहयोग से जिसका जितना भला हो सके करते रहना चाहिए। यही इंसानियत का पैगाम भी है।

कुछ मालूम भी है आपको। वो समाज बड़ा ही उदासीन होता है, जहां चोर भाई नहीं होते। चोर भाईयों का होना ठीक उतना ही जरूरी है जितना कि दाल में नमक। अगर चोर भाई नहीं होंगे तो समाज का रहन-सहन गड़बड़ा जाएगा। फिर तो हर बड़ा-छोटा अपनी ली और पहनी हुई चीज पर इतराता फिरेगा। दूसरों को जलाएगा। चोर भाईयों के रहते कम से कम लोगों के भीतर खौफ तो बना रहता है कि कहीं हमारी चीज चोरी न चली जाए! हम कहीं लुट न जाएं! दरअसल चोरी-चकारी एक आदर्श व्यवस्था है अगर सुचारू रूप से चलाई जाए तो। लोगों को चोर भाईयों व चोरी के प्रति अपने नजरिए को बदलने की आवश्यकता है। जिस प्रकार प्रकृति में संतुलन का बने जरूरी है, ठीक वैसे ही समाज के मध्य भी।

सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात, रुपया-पैसा, जमीन-जायदाद, जोरू-दारू समाज के बीच हर वक्त कुछ न कुछ करते-करवाते ही रहते हैं। एक दफा जरा ठंडे दिमाग से सोचकर देखिए कि अगर इनमें से एक भी चीज न हो तो जीवन कितना बेनूर-बेरंग-सा हो जाएगा! फिर न मुझे यहां रहने में लुत्फ आएगा न ही आपको। आप ईमानदारी का गाना कितना ही गा लें किंतु एक समय यही ईमानदारी आपको उक्ताने भी लगेगी। जीवन में जब तक चोरी-चकारे के बहाने एक-दूसरे के खिलाफ भागमभाग नहीं होगी फिर जीने में मजा ही कहां आएगा!
मेरे विचार में सोना इस वक्त बिल्कुल ठीक राह पर है। चेन चोर इसकी चकम को मौका-बेमौका भुना रहे हैं यही उचित भी है। हम तो बस यही चाहते हैं कि किसी के भी पेट पर लात न पड़े। सबकी रोजी-रोटी बनी रहे। सोना अपना काम करता रहे। खास वर्ग अपना। और चेन चोर अपना। अब ऐसे-वैसी खबरें हैं खबरों क्या। जितने मुंह उतनी बातें तो होनी ही हैं। खबरों से बस खबरदार रहिए और अगली चेन चोरी पर रूआंसा नहीं बेशर्म बनिए ताकि चेन चोर भी यह समझ सकें कि आपका दिल कित्ता बड़ा है!

कोई टिप्पणी नहीं: