बुधवार, 10 अगस्त 2011

बाबा संग राखी : खूब जमेगी जोड़ी

पन राखी सावंत को यूंही नहीं चाहते। इस चाहत के पीछे उनकी बोल्डनेस के प्रति अपन का मोह है। मोह भी कोई ऐसा-वैसा नहीं जबरदस्त वाला। अख्खा फिल्म लाइन में एक राखी सावंत ही हैं जो अपने कहे पर न माफी मांगती हैं न पीछे हटती हैं। एक दफा जो बोल दिया सो बोल दिया। यही वजह है कि बोल्डनेस राखी सावंत का सिंबल बन गई है।

राखी सावंत ने एक बार फिर से अपनी बोल्डनेस को जग-जाहिर किया है। कहा है कि वे योगगुरू बाबा रामदेव से शादी करने को तैयार हैं। अगर बाबा राजी हों तो! हालांकि बाबा की तरफ से राखी के कहे पर अभी कोई प्रतिउत्तर नहीं आया है परंतु यह प्रस्ताव है बहुत उम्दा। राखी और बाबा की जोड़ी मस्त जमेगी। बेशक दोनों की विचारधाराएं अलग-अलग हैं पर इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। इतना फर्क तो दो जन के बीच चलता ही है। लेकिन हां बोल्डनेस के मामले में राखी बाबा से बीस ही बैठती हैं। बाबा तो बात कहकर पलटी मार भी जाते हैं परंतु राखी नहीं पलटती।

देखा जाए तो बालकृष्ण की नैया डांवा-डोल होने के बाद से बाबा को अपने ताईं एक सहारे की सख्त जरूरत भी आन पड़ी है। बाबा के लिए राखी से बेहतर सहारा भला और क्या और कहां मिल सकता है? राखी का साथ पाकर बाबा की भटकाहट कुछ तो कम होगी। पुनः वे अपने पुराने काम यानी योग शिक्षा पर वापस लौट सकेंगे। अब जब उनकी वापसी होगी तो उनके संग बालक बालकृष्ण की जगह बालिका राखी सावंत को देखकर उनके भक्त कित्ते प्रसन्न होंगे, इसकी कल्पना मात्र से ही अपन सिहर उठते हैं। बाबा और राखी की संयुक्त योग शिक्षा का प्रदर्शन कितनों को नैन लाभ कराएगा यह सहजता से समझा जा सकता है। बाबा की अनुपस्थिति में राखी की योग शिक्षा जाने कितने दिल के मरीजों को यूंही ठीक कर देगी। फिर कभी वे अपने दिल के बैठने या उठने की शिकायत न घर में करेंगे न ही बाहर। अपन को पक्का विश्चास है कि बाबा और राखी के योग शिविर उनके भक्तों के भीतर एक नई तरह की स्फूर्ति का संचार करेंगे!

रामलीला मैदान की घटना के बाद से बाबा काफी अपसेट से चल रहे हैं। अब तो कभी-कभार की टी. वी. पर बयान देने आते हैं। भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ चल रहा उनका संघर्ष भी ठंडा-सा पड़ने लगा है। इस बहाने विवाद बढ़ गए हैं सो अलग। बावजूद इसके बाबा होकर उनने जिस तरह की वीरता दिखाई है, अपने ख्याल से राखी सावंत को यही भा गया है। वरना एक हसीन महिला क्यों संत के साथ संग होना की इच्छा जताएगी! हमें आगे बढ़कर राखी के इस फैसले की प्रशंसा करनी चाहिए। साथ ही बाबा को भी समझाना चाहिए कि वे इस विषय में सोचें जरूर।

अब रही बात लोगों के कहने की तो उन्हें कहने दीजिए। कुछ लोगों को केवल कहने में ही सुकून मिलता है। खुद कुछ कर पाते नहीं जो बेचारा करने की इच्छा जाहिर करता है उसे ऐसा-वैसा कहकर बदनाम करते हैं। अरे भई अब क्या किया जाए जो राखी का दिल बाबा पर आ गया। यह दिल है किसी पर, कभी भी आ सकता है। किसी ने क्या खूब कहा है कि दिल पर किसी का जोर नहीं होता, दिल की आवाज से शोर नहीं होता। योग गुरू पर दिल आने का मतलब आप समझते हैं। दिल की पूरी हिफाजत। इस बहाने राखी का यहां-वहां भटकता दिल हमेशा योग की छत्र-छाया में रहेगा। एक हसीन व्यक्ति को स्वस्थ दिल के अतिरिक्त और क्या चाहिए!

आपसे गुजारिश है कि राखी या बाबा के विषय में गढ़े मुरदे न उखाड़ें। बीती बातों का समय अब बीत चुका है। इस वक्त तो सुंदरता और योग शिक्षा की बातें करें बस। यही शाश्वत है। राखी और योग गुरू की छत्र-छाया में सब जन निरोगी रहें भला हमें और क्या चाहिए!

हे! भाग्यविधाता अब तेरा सहारा है, तू ही कुछ कर। राखी और बाबा की राहें एक कर दे। इस नाते कुछ हद तक राखी भी संभल जाएंगी और बाबा भी भ्रष्टाचार और काले धन पर से ध्यान हटाकर सौंदर्य की दुनिया में लौट आएंगे। जय हो।

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